पीपल एक ऐसा वृक्ष है जो आदि काल से स्वर्ग लोक के वट वृक्ष के रूप में इस धरती पर ब्रह्मा , जी के तप से उतरा है पीपल के हर पात में ब्रह्मा जी का वास माना जाता है आदि शंकराचार्य ने पीपल की पूजा को जहाँ पर्यावरण की सुरक्षा से जोड़ा है वही इसके पूजन से दैहिक , दैविक और भौतिक ताप दूर होने की बात भी कही है ।
पीपल न केवल एक पूज्यनीय वृक्ष है बल्कि इसके बृक्ष खाल , तना , पत्ते, तथा बिज आयुर्वेद की अनुपम देन भी है पीपल को निघनटु शास्त्र ने ऐसी अजर- अमर बूटी का नाम दिया है जिसके सेवन से वात रोग , कफ रोग, और पित्त रोग नष्ट होते है ।
भगवाद्रिता में भी इसकी महानता का स्पस्ट उलेख्य है गीता में इसे वृक्षों में श्रेष्ठ 'अश्वतथ्य ' को अथर्ववेद में लक्ष्मी , संतान व आयुदाता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है कहा जाता है की इसकी परिक्रमा मात्र से हरोग नाशक शक्ति दाता पीपल मनोवांछित फल प्रदान करता है गंधर्वों, अफ्सराओं, यक्षिणी, भूत-प्रेतात्माओं का निवास स्थल , जातक कथाओं , पंचतंत्र की विबिध कथाओं का घटना स्थल तपस्वियों का आहार स्थल होने के कारण पीपल का महातम्य दुगुना हो जाता है ।
पीपल न केवल एक पूज्यनीय वृक्ष है बल्कि इसके बृक्ष खाल , तना , पत्ते, तथा बिज आयुर्वेद की अनुपम देन भी है पीपल को निघनटु शास्त्र ने ऐसी अजर- अमर बूटी का नाम दिया है जिसके सेवन से वात रोग , कफ रोग, और पित्त रोग नष्ट होते है ।
भगवाद्रिता में भी इसकी महानता का स्पस्ट उलेख्य है गीता में इसे वृक्षों में श्रेष्ठ 'अश्वतथ्य ' को अथर्ववेद में लक्ष्मी , संतान व आयुदाता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है कहा जाता है की इसकी परिक्रमा मात्र से हरोग नाशक शक्ति दाता पीपल मनोवांछित फल प्रदान करता है गंधर्वों, अफ्सराओं, यक्षिणी, भूत-प्रेतात्माओं का निवास स्थल , जातक कथाओं , पंचतंत्र की विबिध कथाओं का घटना स्थल तपस्वियों का आहार स्थल होने के कारण पीपल का महातम्य दुगुना हो जाता है ।
bahu acchha pandit ji, sahi bat likha hai aapne
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