Sunday, 5 February 2012

जीवन एक अजीव भूल भुलैया है.......

जीवन एक अजीव भूल भुलैया है !

कोई किसी को नहीं समझ पाया है इस कल्पनातीत संसार में ! हर व्यक्ति मौसम कि तरह रंग बदलने लगा है !

किसी कि फितरत पहचानना बहुत मुश्किल काम है !

किसी विचार व्यक्त किया था मुझे कि संवाद से सारी समस्याएँ हल हो जाती है, लेकिन संवाद तो उसी के साथ किया जा सकता है ना जो सवालों के जवाब देने को राजी हो !

जो व्यक्ति ख़ामोशी चादर ओढ़ ले उससे भला संवाद कैसे वाजिब है ? या जो कभी समझना ही न चाहे उसे केसे समझाया जा सकता है ?

पर .....

अपनी फितरत से जो अनजान हुआ करता है जिंदगी भर परेशांन हुआ करता है !

पल भर में जो छा जाए किसी तूफाँ सा चंद लम्हों का ही महमान हुआ करता है !

कहने को तो जान पहचान तो होती है दुश्मनों से भी और चलते राह गीरो से भी !

पर जिंदगीमें हम अजीम किसी को देते है प्यार वो सबसे बड़ा मान हुआ करता है !!

No comments:

Post a Comment